रणथंभौर के त्रिनेत्र गणेश जी का मंदिर बहुत प्राचीन मंदिर है । गणेश जी की सभी देवताओं में प्रथम पूजा की जाती है । यह मंदिर वैसे तो रणथंबोर में स्थित है लेकिन यहां आने के लिए हमें राजस्थान की राजधानी जयपुर से सवाई माधोपुर आना पड़ता है, जो कि लगभग 166 किलोमीटर की दूरी पर है । सवाई माधोपुर से रणथंबोर जाने के लिए टैक्सी मिल जाती है । यह दूरी 10 से 12 किलोमीटर तक की है । जिसको तय करने में 15 से 20 मिनट लग जाते हैं । रास्ते में जो जंगल आता है उसमें कभी-कभी शेर और चीते भी दिखाई देते हैं । रणथंबोर के दुर्ग में 7 दरवाजे पार करने के बाद त्रिनेत्र गणेश जी महाराज के दर्शन होते हैं । यहां पर मान्यता है कि इस रास्ते में जो लोग दर्शन करने आते हैं, वह पहले गणेश जी से प्रार्थना करके और पत्थरों से घर बनाते हैं । गणेश जी की कृपा से उनके बड़े-बड़े मकानों का बिना किसी विघ्न के निर्माण हो जाता है और सभी तरह की मनोकामनाएं पूरी होती हैं जिनके घर में विवाह होता है तो सबसे पहले विवाह की पत्रिका त्रिनेत्र गणेश जी को चढ़ा कर विवाह में आने का निमंत्रण दिया जाता है । अलग-अलग भाषाओं में पूरे भारत से सभी विवाह की पत्रिकाएं गणेश जी को भेजते हैं । और सभी पत्रिकाओं को गणेश जी को पढ़कर सुनाया जाता है । वे विवाह बिना किसी बिना विघ्न के संपन्न हो जाते हैं । अगर किसी के संतान नहीं होती है तो वहां पर दर्शन करके मनोकामना मांगकर श्रीफल प्रसाद पूर्वक दिया जाता है और मनोकामना पूरी होने पर श्रद्धालु गणेश जी के यहां स्वामिनी करके प्रसाद चढ़ाते हैं । जो लोग नित्य गणेश जी के दर्शन करने आते हैं वह अपने सुखमय जीवन का आधार गणपति जी को ही मानते हैं । इस दुर्ग में 7 दरवाजे हैं ।
।। ॐ एकदंताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो दंती प्रचोदयात् ।।
।। ॐ एकदंताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो दंती प्रचोदयात् ।।
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